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Aishani Aishani

Romance

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Aishani Aishani

Romance

pyar-- गले से लगा ही लूँ क्या?

pyar-- गले से लगा ही लूँ क्या?

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अब तुमको मैं अपना बना ही लूँ क्या...? 

तुमको हँसके गले से लगा ही लूँ क्या...? 


यूँ बंद आँखों से देखोगे कबतक मुझे, 

मैं आँखों में तुमको बसा ही लूँ क्या...? 


अंजाना शहर और तुम अजनबी हो, 

मेरे दिल को शहर मैं बना ही लूँ क्या...? 


जाने कितने शहर से निकाले हुए हो, 

अपने दिल में तुम्हें मैं बसा ही लूँ क्या...? 


किसी दरिया-सा दौड़े चले आ रहे हो,

कहो, ख़ुद को समंदर बना ही लूँ क्या...? 



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