प्यासा सावन
प्यासा सावन
आँखों में प्यासा सावन, और बादल भी बेचैन,
बूँदों की आहट सुनकर, मिल गया दिल को चैन।
भीगी-भीगी शाम हुई, चुपके से वह मुस्काई,
माटी की खुशबू ने फिर, मन की प्यास बुझाई।
बादल की ओट से झाँके, चाँद सलोना आज,
बूँदों ने धरती के संग, बजा लिया मधुर साज़।
कदंब की डाली झूम उठी, पवन चली मदमात,
सावन ने हर पत्ती पर, लिख दी मिलन की बात।
झूले पर झूम रही डालियाँ, रिमझिम गाए गीत,
मन के सूने आँगन में, याद आई प्रिया की प्रीत।
“मुरली” के सुनसान मन में, सावन ने रंग भरे,
प्यासे-प्यासे मौसम में, ख्वाबो के फूल खिले।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

