सपनों की उड़ान
सपनों की उड़ान
सपनों की पंख लेकर मुझे आकाश में उड़ना है,
तारों के संग मिलकर मुझे नई दुनिया बसाना है।
अँधियारी रात आए तो भी मैं हिम्मत नहीं हारुँगा,
सूरज बनकर मुझे जीवन में उजियारा करना है।
मंज़िल भले ही हो दूर, कभी में मायूस बनुंगा नही,
हर एक मुश्किलों का हँसकर मुझे सामना करना है।
तक़दीर का दरवाजा खुलने का इंतज़ार करुँगा नहीं,
मेहनत के पसीने से मुझे अपना भाग्य लिखना है।
भले ही तूफ़ान आए राह में, हौसला कम होगा नहीं,
विश्वास की नाव लेकर मुझे सागर में सफ़र करना है।
भटक पटक कर गिरकर भी फिर से आगे बढुंगा मैं,
जिंदगी के खेल को जीतकर मुझे सपना सज़ाना है।
‘मुरली’ सपने सच करुंगा मैं, दिल में होंसला भरकर,
मेरे जीवन के आसमान में अब बसंत को लहराना है।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली (ज़ुनागढ-गुजरात)
