जीवन का सार बस प्यार
जीवन का सार बस प्यार
जीवन की हर राह का आधार बस प्यार है,
इस दिल की धड़कन का इकरार बस प्यार है।
नफ़रत के अँधेरों को जो मिटा देता है पल में,
इंसानियत के दीप का उजियार बस प्यार है।
सूनी सी ज़िंदगी में जो लहराती बसंत भर दे,
पतझड़ में खिलता हुआ गुलज़ार बस प्यार है।
दौलत और शोहरत से मिले दिल का सुकून,
रूह को हरपल कर दे ख़ुशगवार बस प्यार है।
रिश्तों की डोर को जो हमेशा मज़बूत बनाए,
विश्वास के इस मंदिर का द्वार ही बस प्यार है।
दर्दों की धूप में जो छाया बनकर आश्रय दे,
हर ज़ख़्म का सबसे बड़ा उपचार बस प्यार है।
“मुरली” यह बात को जीवन का सत्य समझो,
इस अनमोल जीवन जीने का सार बस प्यार है।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरा

