नयन के तीर
नयन के तीर
नयन के तीर से घायल हुआ है दिल मेरा,
तेरी ही याद में हर पल जला है दिल मेरा।
तेरी निगाह में ऐसी कशिश है जानेमन,
कि तुझे देखकर मिल गया है दिल मेरा।
हवा भी तेरी ख़ुशबू का पता पूछती रही,
तेरे ख़यालों में फिर से खिला है दिल मेरा।
तेरी ख़ामोशी भी कहती है दास्ताँ कोई,
उसी ख़ामोशियों को पढ़ रहा है दिल मेरा।
न तू करीब है, न कोई फ़ासला कम है,
अजब सी राह में तन्हा रहा है दिल मेरा।
तेरे बिना हरपल मुझे इंतज़ार रहता है,
तेरे ही नाम से अब धड़कता है दिल मेरा।
‘मुरली’ ये इश्क़ का किस्सा भी गज़ब है,
जिसे भुला था, उसी पे फ़िदा है दिल मेरा।
रचना:-धनजीभाई गढिया"मुरली" (ज़ूनागढ-गुजरात)

