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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

कान्हा के रंग में रंगा मेरो मन

कान्हा के रंग में रंगा मेरो मन

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कान्हा के रंग में रंगा मेरा मन,
त्याग दिया जग का सब बंधन।

साँवली सुरत बसी इन आँखों में,
हर पल अब तो होता सुमिरन। ​

अधर धरते ही मधुर तान छिड़ी,
तृप्त हुआ राधाजी का तन मन। ​

गोकुल की गलियों का मैं रज हूँ,
माखनचोर पर न्यौछावर यह तन।

​प्रेम की धारा बहती है अविरल,
जीवन बीतने लगा है अब सरल। ​

बंसी की धुनों पर झूम उठे सब,
कान्हा ही जीवन, कान्हा ही शरण।

"मुरली" कान्हा के ​चरणों समर्पित,
पा लिया मैंने भक्ति का पावन धन।

 रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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