प्रकृति के सानिध्य में
प्रकृति के सानिध्य में
जीवन हमारा खिलता है प्रकृति के सानिध्य में,
हरियाली भी लहराती है, प्रकृति के सानिध्य में।
फूलों की खुशबू ये वातावरण को महकाता है,
मधुकर तराने गा रहे है, प्रकृति के सानिध्य में।
लहराता समिर सररर सररर संगीत सुनाता है,
लता-पता मुस्कुराती है, प्रकृति के सानिध्य में।
नदि-झरनों का प्रवाह खलल खलल बहता है,
पंछि कलशोर करते है, प्रकृती के सानिध्य में।
आसमान में कल्पनाओं की उड़ान मन भरता है,
मन मदहोंश बन जाता है, प्रकृति के सानिध्य में।
प्रकृति का रक्षण करना सब मानव का फर्ज है,
"मुरली" मल्हार बजाता है, प्रकृति के सानिध्य में।
स्चना:-
धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)
