प्रेम का प्याला
प्रेम का प्याला
चाँदनी रात में उठाया मैने प्रेम का प्याला,
पी लिया ख़्वाबों को और दिल ने सँभाला।
तेरा नाम जैसी दिल में महकती कोई ख़ुशबू,
तेरी यादों से सजी है मेरी जिंदगी की आरज़ू।
इश्क़ की एक बूँद भी वीरान दिल को भर दे,
सूखे रेगिस्तान में फूलों का मौसम महका दे।
प्याला खाली हो जाए, मिठास फिर भी रहे,
जैसे बारिश के बाद भी मिट्टी की ख़ुशबू रहे।
अगर इश्क़ सफ़र है, तो तेरा हमेशा साथ रहे,
हर मोड़ पर सितारों की तरह तेरा उजास रहे।
"मुरली" आख़िरी प्याला प्रेम का मिले ऊपर से,
मेरा रोम रोम लहरा जाए तेरे प्रेम के प्याले से।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

