कज़रारे नैना
कज़रारे नैना
कजरारे तेरे नैना देखकर, मेरे दिल को हुआ है प्यार,
नज़र से नज़र जब मिली तो, भूल गया सारा संसार।
तेरी चितवन की चमक से, खिल उठी है बसंत-बहार,
नैनों की भाषा पढ़ते ही, मन करने लग गया पुकार।
जब से देखा है तुझको मैंने, हरपल किया है इंतज़ार,
कजरारे नैनों के जादू से, मेरा दिल हो गया बेकरार।
तेरे निखरते योवन की चमक, मुझे लगती है बेसुमार,
तेरी एक मुस्कान दिल मेरा, तुझ पे हो गया है निसार।
रोम-रोम मेरा झूम उठा, गज़ब का है तेरा खुमार,
तेरे नैनों का तीर लगा दिल पे, छेद किया आर-पार।
चाँद भी तेरी सूरत को देखकर, हो गया है शर्मसार,
तेरी सुंदरता की चाँदनी से, आज महका सारा संसार।
“मुरली” तेरे नैनों का अब, मेरे दिल पर है अधिकार,
एक नज़र से कर दे इनायत, मिट जाए मेरा इंतज़ार।
रचना:-धनजीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)
(साहित्यकार एवम् शास्त्रिय संगीतकार)

