Mayank Kumar
Abstract Drama Tragedy
महल का संगीत हुआ तेज़
पहरेदार हुआ मगन
अब पीछे छूटा देश
भेष बना अनेक
कांपता है महल बस
संगीत के धुन से
बाहरी दुनिया का
शोर हुआ गुम
थक जाओ फिर चलो
राजा के हुक्म से
राजा अब डरता है
पहरेदार के हुंकार से,
पहरेदार हुआ मगन !
तुम एक कलम सी...
उस चाँद का भी...
कुछ खिला चंदा...
पहरेदार
आधी रोटी
मैं भीग रहा ह...
तू कहीं खो गय...
कुछ बातों को ...
मैं तेरे लिए ...
मेरे अंदर वह ...
कैसे वक़्त के साथ आँख का आँसू सूख जाता है कैसे वक़्त के साथ आँख का आँसू सूख जाता है
इंतजार करता किसका भला? कल काल गाल समाता रहा, इंतजार करता किसका भला? कल काल गाल समाता रहा,
नाम बदनाम कर दिया जिसके लिये जीते थे उसी ने जीते जी मार दिया। नाम बदनाम कर दिया जिसके लिये जीते थे उसी ने जीते जी मार दिया।
सावन तो आ गया बरसात न आई थी। मौसम में गर्मी उतनी ही समाई थी। सावन तो आ गया बरसात न आई थी। मौसम में गर्मी उतनी ही समाई थी।
सुख दु:ख तो चोली दामन जैसा आता जाता है। सुख दु:ख तो चोली दामन जैसा आता जाता है।
सही गलत पहचान, अपना पराया करना छोड़ तू।। सही गलत पहचान, अपना पराया करना छोड़ तू।।
पहली बारिश हुई और दिल ने बगावत कर दी. पहली बारिश हुई और दिल ने बगावत कर दी.
भूल न जाना उन ख़ुशियों को ग़म के अँधेरे में। भूल न जाना उन ख़ुशियों को ग़म के अँधेरे में।
आखिर दिल ही तो है जीने के लिए काफी। आखिर दिल ही तो है जीने के लिए काफी।
वक़्त के सुर ताल सरगम से अलग साज़ से हम थरथराये चले गए वक़्त के सुर ताल सरगम से अलग साज़ से हम थरथराये चले गए
करा देती मुलाकात, आँखें बता देती बात। करा देती मुलाकात, आँखें बता देती बात।
पर्यावरण पर आज पृथ्वी का करती श्रृंगार प्रकृति पर्यावरण पर आज पृथ्वी का करती श्रृंगार प्रकृति
जब हिला एक तिनका, वो उकता गया था उन्ही से. जब हिला एक तिनका, वो उकता गया था उन्ही से.
मुखौटा एक इंसान के चेहरे को ढांकने की वस्तु है। मुखौटा एक इंसान के चेहरे को ढांकने की वस्तु है।
स्नेही वामा, हे सुता की जनानी । प्यारी माता, प्यार की है मुहानी स्नेही वामा, हे सुता की जनानी । प्यारी माता, प्यार की है मुहानी
पहली बारिश हुई और दिलने बगावत कर दी पुरानी वो हसीन यॉदे फिरसे ताजा कर दी. पहली बारिश हुई और दिलने बगावत कर दी पुरानी वो हसीन यॉदे फिरसे ताजा कर दी.
न जीत हो न हार हो बस जीवन एक त्यौहार हो और क्या चाहिये। न जीत हो न हार हो बस जीवन एक त्यौहार हो और क्या चाहिये।
खिलती कलियां यह भी कहती, कांटे बनकर चुभना होती खिलती कलियां यह भी कहती, कांटे बनकर चुभना होती
लग जाये दुआ, ना लगे नज़र । करता हूं कामना प्रत्येक प्रहर ॥ लग जाये दुआ, ना लगे नज़र । करता हूं कामना प्रत्येक प्रहर ॥
भला बुरा जो तुमने किया , किसी ने न देखा ,.... मगर उसने देख लिया। भला बुरा जो तुमने किया , किसी ने न देखा ,.... मगर उसने देख लिया।