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Mayank Kumar 'Singh'

Abstract Drama Tragedy


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Mayank Kumar 'Singh'

Abstract Drama Tragedy


पहरेदार

पहरेदार

1 min 345 1 min 345

महल का संगीत हुआ तेज़

पहरेदार हुआ मगन

अब पीछे छूटा देश

भेष बना अनेक

कांपता है महल बस


संगीत के धुन से

बाहरी दुनिया का

शोर हुआ गुम

पहरेदार हुआ मगन


थक जाओ फिर चलो

राजा के हुक्म से

राजा अब डरता है

पहरेदार के हुंकार से,

पहरेदार हुआ मगन !


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