STORYMIRROR

Deepti S

Classics Inspirational

4  

Deepti S

Classics Inspirational

पथ

पथ

1 min
505

निरन्तर बढ़ते जाना है 

इस जीवन पथ पर

कभी झुककर कभी अड़कर 

निभाना इस पथ को


अपने को यूँ व्यर्थ न समझो

दुखों में ममता का पान पाओगे 

इन्हीं से,पथ पर


कभी गिरोगे 

कभी गगन छुओगे 

पर पंखों को उतना फैलाना 

के लौट आओ अपने पथ पर

पा लेना फ़तेह 


हर दुःख की चोटी पर

सुख में अपनों को न भूल जाना,

इस पथ पर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics