STORYMIRROR

Yashvi bali

Classics Inspirational

4  

Yashvi bali

Classics Inspirational

एहसास ही सुकून

एहसास ही सुकून

1 min
230

एहसास ही सुकून है 

कुछ पल की ज़िंदगी है 

सुनते आए है सब

जीने के अन्दाज़ नए नए

अपनाते आए सब


सफ़र शुरू किया जब

कई सुहाने मोड़ आए

हर पल को जिया  

और पीछे छोड़ आए  


याद नही आया कभी उसे वो

जिस ने रचा था ये संसार सारा


एक सूरज और एक चाँद 

भी बनाया था उसने

सूरज में गर्मी थी पर रोशनी हर मोड़ पे थी

चाँद की रोशनी कम थी

पर शीतलता की कोई होड़ ना थी 

दोनो अपनी जगह पे क़ायम रहे 


एक इंसान ही

ऐसा बनाया जिसे कभी सुकून नही था 

परेशान खुद था

तुझ पे भी सवाल उठाया  

भूल गया हर उस पल , लम्हे को 

जिस को था भरपूर जिया  

धूप और छाँव तो चलेंगे साथ साथ  

जिसको था महसूस किया 


सुकून पाना है तो बेसकूँ क्यूँ होता है 

महसूस कर उसे अपने सब एहसासों में,,

हर पल सुकून मिलेगा तुझे तेरी अपनी साँसो में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics