STORYMIRROR

Deepti S

Inspirational

4  

Deepti S

Inspirational

सर्द हवाएँ

सर्द हवाएँ

1 min
358

ये ठिठुरन ये सर्द हवायें अंतर्मन तन से ये पूछे जायें

कि कैसे मिटती है गली नुक्कड़ पर बैठे बेघर लोगों की ठंड


कैसे इन लोगों को इस ठंड के थपेड़ों से बचायें

चारों ओर जब देखूँ कड़कती सर्दी हर पल ये सवाल सताये


सोचूँ एकजुट कर सबको इनके लिए कम्बल दे आऊँ

या समाज को जाग्रत कर इन्हें तम्बू में रहने की व्यवस्था कराऊँ


एक और तरीक़ा है,हम सब जब भी ठंड में घर से बाहर जायें

घर के पुराने ऊनी कपड़े साथ ले जाकर ज़रूरतमंदों को दे आयें


कुछ दूसरों के लिए अच्छा करने से ही मन को भी चैन आये

न सताएँगी ये बातें हमें न सताएँगी उन लोगों को सर्द हवाएँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational