STORYMIRROR

Deepti S

Classics Inspirational

4  

Deepti S

Classics Inspirational

खुली हवा

खुली हवा

1 min
538

उच्च से उच्च पद पर पहुँचने के लिए

ऐ इंसान तूने स्वयं की साँसों से समझौता कर लिया

जी नहीं पाते हो अब खुली हवा में 

अपने मन को भी पिंजड़े में बंद कर लिया


न कह पाते हो दिल की बात अपनों से ही

न ही साँसों को शुद्ध वायु में ले जा पाते हो

इमारतें तो बड़ी कर लीं 

फिर क्यूँ दिल से दिल को न जोड़ पाते हो


सोचो क्या रह जायेगा जब साँसे ही न रहेंगी

अपने भी कद्र करेंगे जब साँसे इस दुनिया से रूखसत होंगी

हो सके तो जी लो खुलकर ज़िंदगी को

क्या पता कल, आपकी साँसें खुली हवा को तरसेंगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics