आँसू
आँसू
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कभी ग़म तो कभी ख़ुशियों में छलकते हैं
ये आँसू हैं बिन बादल भी बरसते हैं
ख़ुशियों में आत्मा को छू लेने वाले पल
ग़म में आत्मा को झकझोरने वाले पलों पर भारी होते हैं आँसू
कोई कहता है कि आँखों से मोती न गिराओ
तो कोई घड़ियाल आँसू कह दिल को दुखाता है
फेर सिर्फ़ कुछ जज़्बातों को समझने का है
वरना भगवान भी आँसू को छिपाने वाला का साथ देता है
कभी भीग जातीं पलकें आँसुओं से,किसी की विदाई पर
कभी किसी के मिलन पर चुपके से कोने से ढलक जाते
आँखों को खोलना भी चाहें तो समुंदर उफान देता है
थमने के बजाय और उमड़ के एक एक आँसू सागर भर देता है.
