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Nand Kumar

Romance

4  

Nand Kumar

Romance

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा

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प्रतीक्षा अपनेपन का एक है अहसास प्यारा।

राह तकते रात दिन का एक है वो ही सहारा। 


आएगा वो पास मेरे बाहो मे मुझको भरेगा ।

चूमकर मस्तक हमारा कण्ठ से लेगा लगा।


सारे शिकवे दूर होंगे जो अभी दिल मे हमारे ।

पा उसे भूलूंगी मै जो वेदना मन में हमारे ।


मेघ बन बरसे हमारे नयन मिट मालिन्य जाए।

प्रिय विरह के बाद पल उल्लास के जीवन में आए।


घर मे रहने पर भी तेरी जो प्रतीक्षा कर रहा।

सुख मिले सब आपको हंस दु:ख को जिसने सहा।

 

देर से घर आए तो पाया नजर उनकी गेट पर ही।

मिल के उनसे बात करने में भला क्या हर्ज ही। 

 

बोझ लगते आज वो जिन बोझ ढोया आपका।

कब मिलेगी मुक्ति सोचे कृत्य करते पाप का ।


जानते मूरख नही कितनी उन्होंने की प्रतीक्षा ।

जिन्दगी तेरी बनाई की नही खुद की समीक्षा ।।


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