STORYMIRROR

Deepti S

Crime Inspirational

4  

Deepti S

Crime Inspirational

Prompt 2-जानवर से बदतर बनता इंसान

Prompt 2-जानवर से बदतर बनता इंसान

1 min
232

परिस्थितियाँ बिगड़ते देख 

इंसान भी रंग दिखाने लगा

पा काया मानुष की

ख़ूँख़ार जानवर सा रूप लाने लगा


बिकने लगा जब प्राकृतिक देन हवा पानी 

तब भाव इंसान का भी बढ़ने लगा

देख दूजे को मृत्युशय्या पर

उसके प्राणों का मोल रखने लगा


देख ऐसी दशा अपने समाज की

दिल जोरों से धड़कने लगा

जानवर भी अच्छे होते हैं आज के इंसान से

बस दिल मन में यही बसने लगा


हो सके तो धरा के प्राणियों 

दिल को दिल ही रहने दो 

अब प्रकृति अपने पर आ रही है

इसके कुछ नियम मान खुद को इंसान ही रहने दो



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Crime