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Sandeep Suman Chourasia

Drama Tragedy

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Sandeep Suman Chourasia

Drama Tragedy

'प्रेम' और 'जाति' भाग-१

'प्रेम' और 'जाति' भाग-१

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संस्कारों के आड़ में,

खुद को रोक रखी थी वो,

प्रेम तो उसे भी था उससे,

फिर भी सोच रही थी वो !


दिल बार-बार कहता घरवाले नहीं मानेंगे,

निचली जाति का है वो,

पर जब-जब वो पास होता,

खुद को पूर्ण पाती थी वो !


पग-पग पर प्रेम की सीख,

देने वाली इस समाज की,

सीने में दबी जाति की,

जहर से डर जाती थी वो !


हिम्मत करके उसने उस लड़के को,

'हाँ' कर जिंदगी अब उसके नाम कर दी,

उसके प्रेम में भी माँ के समान चिंता थी,

पिता के सामान महसूस करती सुरक्षा थी !


जाति का प्रेम से,

दूर-दूर तक कोई नाता ना,

वो इंसान ही था जिसे जैसे उन्हें,

वैसे उसे भी कुदरत नहीं बनाया था !


समय बीता और विवाह बंधन,

का समय समीप आया,

निचली जाति का है लड़का,

जान घर वालों के मन-मस्तिष्क पर-


पूर्व से छाया जाति का,

काला घना कोहरा प्रबल हो आया,

मम्मी-पापा, मामा-मामी सबने,

मिलकर उसे समझाया-

'वो हमारे बराबर का नहीं !'


नीच जाति का है वो इसलिए,

उसे छोटी सोच वाला बतलाया,

होगी बदनामी समाज में,

क्या कहेंगे लोग पापा ने उसे समझाया !


बंद कमरे में बैठ बस रोती,

वो तो बस पूछती खुद से,

मुझे इस दुनिया में मेरे अपनों ने,

या इस समाज ने लाया।


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