Agam Murari
Crime Fantasy Inspirational
ठगा दिल का
पोस्टमार्टम किया
पता चला
ह्रदय की सारी धमनियां
कब की
चोरी कर ली गई हैं।
रिपोर्ट मिला
कुछ पहर पहले
कशीवास को आया
क्योंकि,
किसी के जाने का
दर्द सह ना पाया।
ग़ज़ल
तुम्हें भूलूं...
प्रेम
मैं और तुम
तुम अब भी मुझ...
ग़ज़ल
पोस्टमार्टम र...
इससे और अधिक ...
जल्लाद
आई मिस यू
दुनिया तेजी से कॉरपोरेट खिलाफत बनती जा रही है। दुनिया तेजी से कॉरपोरेट खिलाफत बनती जा रही है।
मिट्टी भी देश की हा-हाकार कर उठी, बच्ची को तिल-तिल मरते जब देखा... मिट्टी भी देश की हा-हाकार कर उठी, बच्ची को तिल-तिल मरते जब देखा...
आदत सी हो गयी है अबनज़रअंदाज़ करने की.. आदत सी हो गयी है अबनज़रअंदाज़ करने की..
भूख में धोखा खा कर, शायद पेट भर गया होगा। फल ना सही बारूद सही, भीतर तो गया होगा। भूख में धोखा खा कर, शायद पेट भर गया होगा। फल ना सही बारूद सही, भीतर तो गया हो...
शायद इसलिए हर एहतियात तुम्हारा बचकाना सा लगता है शायद इसलिए हर एहतियात तुम्हारा बचकाना सा लगता है
वो दर्द की रात थी... तेज बरसात थी... वो दर्द की रात थी... तेज बरसात थी...
तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए। तुम्हें जगना होगा, एक बार फिर, एक बेहतर भविष्य के लिए।
अब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा लूँ...! अब तुम ही, कह दो छः महीने, की है उसका, क्या छिपा लूँ...!
खून खौल उठता है मेरा, आँख से आंसू बहते है एक बच्ची की स्मिता लुटी है, कैसे हम सब चुप बैठे है? ... खून खौल उठता है मेरा, आँख से आंसू बहते है एक बच्ची की स्मिता लुटी है, कैसे हम स...
मैंने लक्ष्मण रेखा कितनी ही खींची संस्कारों की पाप के पुष्पक पर चला गया इज्जत की अर्थी मैंने लक्ष्मण रेखा कितनी ही खींची संस्कारों की पाप के पुष्पक पर चला गया इज्जत...
खुले अम्बर में उड़ने दो, डरती हूं बाहर आने से , मां मुझे कोख में ही रहने दो। खुले अम्बर में उड़ने दो, डरती हूं बाहर आने से , मां मुझे कोख में ही रहने द...
हर रोज स्याह होती जा रही, व्यथाओं की तस्वीर उसकी...! हर रोज स्याह होती जा रही, व्यथाओं की तस्वीर उसकी...!
तेरी बहन तेरे सामने आने से डरेगी, घर क बाहर शैतानों से लड़ती थी, अब घर के अंदर पल रहे तेरी बहन तेरे सामने आने से डरेगी, घर क बाहर शैतानों से लड़ती थी, अब घर के अ...
यूं तो हर रोज थी मगर उस दिन लगा सच में मैं थी एक गंदी गाली यूं तो हर रोज थी मगर उस दिन लगा सच में मैं थी एक गंदी गाली
मैं हतप्रभ हूँ, इन उग्र विचारों के बवंडर से, मैं हतप्रभ हूँ, इन उग्र विचारों के बवंडर से,
'चिंता के कारण बुढ़िया ने मरते समय लिया था नाम, बचा लो उसको कहने वाली थी वो तब तक मिला अंजाम।' न्याय ... 'चिंता के कारण बुढ़िया ने मरते समय लिया था नाम, बचा लो उसको कहने वाली थी वो तब तक...
ख़राबी बस यही हर मुल्क के नक़्शे में रहती है। ख़राबी बस यही हर मुल्क के नक़्शे में रहती है।
कभी धन की ताकत से तो कभी बल की ताकत से रचते अपनी कहानियाँ, कभी धन की ताकत से तो कभी बल की ताकत से रचते अपनी कहानियाँ,
मानती हूँ कि तुम मेरे जीवन में आती तो खुशियों से भर देती मेरा जीवन, मेरे आँचल में पूरे विश्व को स... मानती हूँ कि तुम मेरे जीवन में आती तो खुशियों से भर देती मेरा जीवन, मेरे आँचल...
फिर एक दिन, वो काली घटा छाई, कुछ खूंखार दरिंदों ने ना जाने क्यों, उस पे अपनी नज़र टिकाई...! फिर एक दिन, वो काली घटा छाई, कुछ खूंखार दरिंदों ने ना जाने क्यों, उस पे अपनी नज़...