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Madhu Gupta "अपराजिता"

Inspirational

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Madhu Gupta "अपराजिता"

Inspirational

"फादर्स डे"

"फादर्स डे"

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हमें फूल बनाने से पहले 

उस पेड़ में कितने दर्द है सह

आंधी बारिश और तूफान

सते-हंसते उसने सब है झेले...!! 

भरी दुपहरी जला है वो

फूलों को सहज के रखने में

अपनी की ना परवाह इक पल भी

दे दिया जीवन पूरा का पूरा उन फूलों को...!! 

पिता वहीं है दरख़्त जैसा

ऊपर से है सख्त बड़ा वह

अंदर प्यार का सागर है मचलता

जिससे ना हर कोई देख है पाता...!! 

जो नहीं पा सका जीवन भर वो 

सब अपने फूलों को देना चाहे 

इसीलिए जीवन पर्यंत संघर्ष है करता 

अपनी परवाह और तनिक भी चिंता ना करता...!! 


कठिन परिस्थितियां कितनी भी आएं 

सदा होंठों पर हमारे मुस्कान है लाता 

सारी तपन जीवन अपने की 

हंसकर अपने ही अंदर है समाता...!! 

सारे दर्द छुपा कर अपने वो 

अपने हृदय के कोने में रखता 

और खुशियों का भरा खजाना 

लेकर अपनी जेब में घर को आता...!! 

उंगली पकड़ के हम सब बच्चों को

दुनिया की बातों से है अवगत कराता

जीवन कैसे रखना है तुमको स्थिर

इस बात की हमको शिक्षा बतलाता...!! 

और लिखूं क्या तुमको पापा 

जो लिखती हूं कम लगता है 

लगते हो तुम कभी नीम के जैसे 

पर देते हो तुम सार शहद सा...!! 

तुम जीवन का शब्द हो पहला 

और आखिरी विराम भी तुम हो 

विराम बिना है शब्द अधूरा 

शब्द बिना विराम कहां है पूरा 

पापा तुम बिन हम ना होते पूरे...!! 



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