STORYMIRROR

Nilofar Farooqui Tauseef

Abstract Tragedy Fantasy

4  

Nilofar Farooqui Tauseef

Abstract Tragedy Fantasy

ओल्ड इज़ गोल्ड

ओल्ड इज़ गोल्ड

1 min
161

पुराने रिश्ते जब टूटते हैं

अपने-अपनों से छूटते हैं।

होने लगता है सब सोल्ड,

तो कहती है दुनिया ओल्ड इज़ गोल्ड।


पुरानी दीवार गिर जाती है

पर अपना निशान छोड़ जाती है

ज़मीन की क़ीमत साहेब

तब ही समझ आती है।


संस्कार हमारी विरासत है,

यही तो हमारी ताक़त है,

पश्चिमी सभ्यता कितनी भी आये,

भला कौन तोड़ेगा, किसकी हिमाकत है।


संस्कृति हमारी पहचान है

आन-बान-शान है,

ख़्यालात माना ज़रा पुराने हैं,

पर ज़माने में यही पहचान हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract