ओल्ड इज़ गोल्ड
ओल्ड इज़ गोल्ड
पुराने रिश्ते जब टूटते हैं
अपने-अपनों से छूटते हैं।
होने लगता है सब सोल्ड,
तो कहती है दुनिया ओल्ड इज़ गोल्ड।
पुरानी दीवार गिर जाती है
पर अपना निशान छोड़ जाती है
ज़मीन की क़ीमत साहेब
तब ही समझ आती है।
संस्कार हमारी विरासत है,
यही तो हमारी ताक़त है,
पश्चिमी सभ्यता कितनी भी आये,
भला कौन तोड़ेगा, किसकी हिमाकत है।
संस्कृति हमारी पहचान है
आन-बान-शान है,
ख़्यालात माना ज़रा पुराने हैं,
पर ज़माने में यही पहचान हैं।
