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Nilofar Farooqui Tauseef

Drama Others

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Nilofar Farooqui Tauseef

Drama Others

कफ़न चोर

कफ़न चोर

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अचानक होने लगा, चारों तरफ़ एक शोर।

पकड़ो-पकड़ो, देखो भागा कफ़न चोर।


कुछ ही दूर दौड़ा था कि पकड़ा गया,

सामाजिक धुरंधरों से ही टकरा गया।


हर किसी ने जी भर कर ग़ुस्सा, मासूम पे निकाला,

मरा तो नहीं, पर समझो जैसे मार ही डाला।


लात, घूँसा, मुक्का से जी भर कर बरसात हुई,

पहले मुक्का-लात, फिर थोड़ी बात हुई।


दो बच्चे की ठिठुरन देख न पाया।

न समझ था वो, कफ़न उठा लाया।


लहूलुहान होकर भी दोहराता रहा,

हक़ीक़त से रु-ब-रु कराता रहा।


गुनहगार हूँ मैं, तो बेशक सज़ा दीजिये।

ज़िंदा लोगों से ज़्यादा कफ़न की ज़रूरत है मुर्दों को, तो ओढ़ा दीजिये।

ज़िंदा लोगों से ज़्यादा कफ़न की ज़रूरत है मुर्दों को, तो ओढ़ा दीजिये।



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