ओजस्मयी सूर्य देवता
ओजस्मयी सूर्य देवता
जिनके आगमन से सारी दुनिया की दुकान खुल जाती,
जिनके गमन से शान्ति सर्वत्र छा जाती,
नमन करने को जिन्हें सुबह-सवेरे नतमस्तक सारी दुनिया हो जाती,
परम-प्रतापी सूर्य देवता हैं वे ,जिनकी मौजूदगी से कोशे-कोशे में ज़िन्दगी भर जाती।
पीतांबर रूप धारण करते दिनभर तो सांझ व सवेरे समय मुख पर जिनके लालिमा छा जाती,
प्रकट होने से जिनके छूमंतर सब रोग-कष्ट व हर प्रकार की विपदा हो जातीं जो अन्यथा जम कर कहर हैं बरसातीँ।
इनके प्रकाश से जगमगाते सभी गृह, चन्द्रमा भी इनके प्रावर्तित प्रकाश के सौजन्य से चमकता,
आशा पूर्ण सवेरा ले आते जब प्रतिदिन यें पधारते,जो लौट जाते तो बस अन्धकार और अंधकार ही रह जाता।
ग्रीष्म ऋतु में बहा के सबका खून-पसीना देते सबक कर्मठता का,
तो सर्दियों में सूर्य का ताप व्यथित लोगों की राहत का सबब बन जाता।
इन के तेज के आगे तो निष्ठुर बादलों के तेवर भी ठन्डे पड़ जाते,
जो अन्यथा गरज-गरज कर बेरहमी से घनघोर घटा संग पानी बरसाते।
नियमित रूप से एक समय पर इनका आवागमन देता सबको अनुशासन व समयनिष्ठता की सीख,
और सिखलाते यें कि स्वयं प्रकाशित हों कर ही सम्पूर्ण संसार में जला सकते ज्ञान के प्रज्ज्वलित दीप।
सर्वदा तिमिर नहीं रहता,हर नये दिन का आगाज़ यें ज्ञात कराता ,
क्षणभंगुर है जीवन यें,अस्त हों जाना इनका इस शाश्वत नियम से अवगत कराता।
चहकती चिड़ियाँ, कुसुमित वादियाँ, खिली हुई कलियाँ, नये जीवन, नयी उमंगों का करते आगाज़,
सूर्य देवता की मौजूदगी जगाती सब में हर्षोल्लास संग आत्मविश्वास।
वन-वाणिज्य, पशु पक्षी, वनस्पति और सागर अपना जीवन इनसे हैं पाते,
शाष्टांग -दंडवत -प्रणाम संग हृदय से अभिनन्दन करते सूर्य देवता का
जो हम सबके जीवनयापन की आधारशिला बन जाते।

