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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Fantasy Inspirational Others

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कवि काव्यांश " यथार्थ "

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नवरात्रि- जयकारा मां की

नवरात्रि- जयकारा मां की

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  --- ॥ नवरात्रि की कथा ॥


शक्ति का जब हुआ पुकार,

तब नव दुर्गा आईं करने संहार।


महिषासुर जब जब पाप बढ़ाए,

तब तब माँ ने रण में शस्त्र उठाए॥


नवरात्रि में शक्ति जगाते,

देवी पधारें घर में हमारे।


कलश रखें, दीप जलाएं,

मन में भक्ति प्रेम बसाएं॥


पहले दिन घट स्थापना,

फिर माँ के चरणों में साधना।


रंग-बिरंगे दिन के मेले,

भक्तों के मन खिलें अलबेले॥


अष्टमी को कन्या पूजन,

नवमी में पूर्ण आहुति दान।


दसवें दिन विजय का जयकारा,

बुराई पर हो सत्य की शान॥


 ॥ जय माँ दुर्गा, जय माँ भवानी ॥

   कष्ट हरों मां जय दुख हरनी

हर तरफ हो गुणगान, मां की जय हो    

हर पल शुभ हो, हर नवरात्रि मंगलमय हो!



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