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Tanmay Mehra

Drama

5.0  

Tanmay Mehra

Drama

नारी तुम घुट-घुट कर जीना छोड़ो

नारी तुम घुट-घुट कर जीना छोड़ो

1 min
248


किस तरह लड़ती रही हो

प्यास से परछाइयों से

नींद से अंगड़ाइयों से

मौत से और ज़िंदगी से,


तीज से तन्हाइयों से

सब तपस्या तोड़ डालो

नारी तुम घुट- घुट कर

जीना छोड़ डालो।


किस तरह लड़ती रही हो

परेशानी और अत्याचार से

उत्पीड़न और बलात्कार से

दहेज़ और ससुराल में प्यार से,


पति के जुल्म और मार से

सब तपस्या तोड़ डालो

नारी तुम घुट- घुट कर

जीना छोड़ डालो।


किस तरह लड़ती रही हो

माँ बाप की दूरी से

मायके की मजबूरी से

समाज में नज़रों की छूरी से,


सब तपस्या तोड़ डालो

नारी तुम घुट- घुट कर

जीना छोड़ डालो।


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