STORYMIRROR

Drdeepshikha Divakar

Action

5.0  

Drdeepshikha Divakar

Action

मुल्क

मुल्क

1 min
605


ये मेरा मुल्क है

ये मेरा हिंदुस्तान है

यहा न कोई हिन्दु है

यह न कोई मुस्लिम है।


यहां सब भारतीय है

हमें न मंदिर जाना है

हमें न मस्जिद जाना है

हमें तो मिलकर तिरंगा लहराना है।


हमें न जाति में बांटो

न राजनीति में बांटो

हमें हमारी

काबिलियत से छांटो।


जग में होगा मेरे मुल्क का नाम

ऐसा करेंगे मिलकर हम काम

दुश्मन जो आएगा

मुंह की वो खायेगा।


मेरा मुल्क कल भी

सोने की चिड़िया था

और आज भी है,


कल तिजोरी में सोना था

आज जिगर सोने का है

इस सोने को कोई

नहीं लूट सकता।


दुश्मन है इसी फिराक में तकता

पूरे विश्व मे मेरा मुल्क छाएगा

बच्चा बच्चा

वंदे मातरम गायेगा।


मेरे मुल्क के वीरों तुम्हें नमन है

खुद के उजाड़ के

बचाये हमारे चमन है,


जरूरत पड़ी तो हर भारतीय

दुश्मन को मार गिरायेगा

अपने मुल्क का गौरव

नीचे नहीं झुकायेगा।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Drdeepshikha Divakar

ख्वाब

ख्वाब

1 min पढ़ें

बरखा

बरखा

1 min पढ़ें

ममता

ममता

1 min पढ़ें

वेदना

वेदना

1 min पढ़ें

अतीत

अतीत

1 min पढ़ें

बंधन

बंधन

1 min पढ़ें

बंधन

बंधन

1 min पढ़ें

मुल्क

मुल्क

1 min पढ़ें

दददू

दददू

1 min पढ़ें

दददू

दददू

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Action