STORYMIRROR

payal Khatik

Tragedy

2  

payal Khatik

Tragedy

मुक्कदर

मुक्कदर

1 min
138

दफ़न करना ही है गर, तो सांसो को कीजिए,

अल्फाजों में क्या रक्खा है...!

दोष देना ही हैं अगर, तो अंजाम को दीजिए,

आगाज़ में क्या रक्खा है..!

मुकद्दर तो बस एक बहाना है,

मुकद्दर की आड़ में अपनी हर गलतियों को छिपाना है..!

हम तो बस मुसाफ़िर इस जहां में,

हमारा तो सफ़र ही हैं आना और जाना है....!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy