मुझसे कहा किसी
मुझसे कहा किसी
मुझसे कहा किसी ने अब ग़ज़ल कह दो,
मैंने देखा तेरी औऱ कहा ये ग़ज़ल है तो।
वो देखते रहे आईने की तरह मेरा चेहरा
मैं भी भुला पहर ये कौन सा पल है ठहरा।
इश्क़ क्या होता है समझ न पाया कोई
पल्लू दांतों तले दबाया तब समझ आया।
आपका अपना दोस्त तनहा शायर हूँ

