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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

मुझे मालूम न रहा

मुझे मालूम न रहा

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नजर उसकी कातिल थी, कब मैं घायल हो गया,

मुझे मालूम न रहा और दर्द का दीवाना बन गया।


चेहरा उसका सुंदर था, जिसे मैं देखते ही रह गया,

मुझे मालूम न रहा और चेहरे से मोहित बन गया।


दिल उसका नाजूक था, मैंने धडकन को सुन लिया,

मुझे मालूम न रहा और दिल का ताल मिला लिया।


हुस्न उसका बेशुमार था, जिस से मैं मदहोश हो गया,

मुझे मालूम न रहा और मै अपनी भान-शान खो गया।


नशा उसके इश्क का था, मेरे रोम रोम को लहरा गया,

मुझे मालूम न रहा और "मुरली" को आलिंगन दे दिया।



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