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Dr Rakesh R Mund

Romance

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Dr Rakesh R Mund

Romance

मोहब्बत मेरा

मोहब्बत मेरा

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सिलवटें ले रही हैं साँसें देखकर मोहब्बत मेरी

वक्त न है कह के गुमशुदा ,पाकर मोहब्बत तेरी ...

जंजीर कैसा ये इश्क नाम का जिसका तोड़ नहीं

चाह रखकर भी न चाहे जो उसका कौई जोड़ नहीं ...

इर्दगिर्द रहते गैर कहती जिसे , उन्हें अपना सोचती

अपना कहकर भी हमें यकीनन गैर ही मानती ...

मगरूर है वो या फिर प्यार में किस्मत ही मेरी

जो न समझे प्यार की अहमियत क्या प्यार तेरी ....

इबादत है प्यार मेरा खुदा भी जान लिया होगा

तू बनी नहीं मेरे लिए खुदा अब मान लिया होगा।



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