STORYMIRROR

Minal Aggarwal

Romance

4  

Minal Aggarwal

Romance

रिश्ता तुम्हीं से है

रिश्ता तुम्हीं से है

1 min
202

तुम्हारे और 

मेरे 

दरमियान 

कुछ भी नहीं पर

रिश्ता तुम्हीं से है 

यह जीवन की डोर 

तुम संग ही बंधी है 

तुम ही मेरी परछाई हो 

तुम ही मेरा दर्पण 

तुम्हारे नाम 

मेरा यह जीवन है 

अर्पित 

तुम ही मेरे कृष्ण

तुम ही मेरे मधुबन 

तुम एक सुंदर स्वप्न से हो 

जो भोर होते ही 

आंख खुलते ही 

कहीं खो जाता है 

टूटकर दिल के ही किसी कोने में 

शायद बिखर जाता है लेकिन 

तुमको जब मैंने माना 

अपना तो 

हो तो फिर तुम एक सच ही 

अब इस सच को कैसे 

झुठला दूं 

जो दिल भी मुझे कहे 

बार बार कि 

अब रहने दो 

करो बस भी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance