महाकाल
महाकाल
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ये जो प्यार प्यार कहते हैं
अकसर यही धोका देते हैं ।
गर किसीने किया है प्यार
मृत्यु के बाद भी था आभार ।।
सती को लेके गोद में दस दिग
प्यार में भावुक थे भोला शिव।
नतमस्तक है जग कृपालु देव
सीखा गए थे नारी सम्मान महादेव।।
लेकिन मनुष्य सिर्फ सीखा भांग को
डमरू बाजे भी समझे जो मृदंग को ।
फिर वही नरसंहार चाहिए शायद अब
याद आएगा मनुष्यता महकाल तब ।।
