Gajanan Pandey
Classics
मन आईना है
आंतरिक व बाह्य जगत का
हमारा रूप, चरित्र सब नजर आता है
अच्छे - बुरे भाव सब प्रकट हो जाते हैं।
अच्छा सोचो, बुराई को दूर करो
तब मैल हटेगी
मन - दर्पण में
हमारी सुंदर छवि दिखेगी।
रंग
संस्कारों से ...
जिंदगी का सफर
समय
पुस्तक
ईश्वर
स्वास्थ्य ही ...
क्या भूलूँ, क...
हमारे हाथ कर्...
गमों के बीच खुशियों के गीत गा ले, ए बंदे सकारात्मक भाव जगा ले।। गमों के बीच खुशियों के गीत गा ले, ए बंदे सकारात्मक भाव जगा ले।।
तुमहो मेरे साथी साईं, मेरे ईश्वर मेरे भगवान। तुमहो मेरे साथी साईं, मेरे ईश्वर मेरे भगवान।
तुमसे मिलने से पहले हम कहां शायर थे तुमसे मिलने से पहले हम कहां शायर थे
वहां बंदिशें कैसी भी हो किसी भी तरह की हो रूहानी हो जाती है। वहां बंदिशें कैसी भी हो किसी भी तरह की हो रूहानी हो जाती है।
फसल ए गजल बोया मैंने अपनी नींदों को अपने हाथो गवाया मैंने। फसल ए गजल बोया मैंने अपनी नींदों को अपने हाथो गवाया मैंने।
सृष्टि का अद्भुत ये है लिबास। जिसे ओढे सृष्टि बिंदास।। सृष्टि का अद्भुत ये है लिबास। जिसे ओढे सृष्टि बिंदास।।
ना जाने दो मन क़ो सत्य के विरुद्ध फिर कभी तुम्हारा पथ ना होगा अवरुद्ध ! ना जाने दो मन क़ो सत्य के विरुद्ध फिर कभी तुम्हारा पथ ना होगा अवरुद्ध !
और कुछ नहीं बस कहना इतना है मुझे बड़े होकर बस उनके जैसा बनना है। और कुछ नहीं बस कहना इतना है मुझे बड़े होकर बस उनके जैसा बनना है।
तुम्हारी नजरों से, छुप छुपकर देखा। तुम्हारी नजरों से, छुप छुपकर देखा।
बस याद मुझे तुम, किसी और का मुझको पता नहीं ! बस याद मुझे तुम, किसी और का मुझको पता नहीं !
मां तुमने ही तो हमको धीरे धीरे पढ़ना सिखाया।। मां तुमने ही तो हमको धीरे धीरे पढ़ना सिखाया।।
एक ख़ूबसूरत शाम का साथ है और, मेरा हमसफ़र मेरे साथ है। एक ख़ूबसूरत शाम का साथ है और, मेरा हमसफ़र मेरे साथ है।
वह कौन निशा का एक समर्पण ? वह कौन उषा की मूक फिरन ? वह कौन निशा का एक समर्पण ? वह कौन उषा की मूक फिरन ?
हकीकत में इन अश्कों ने हमें सम्भाले रखा है। हकीकत में इन अश्कों ने हमें सम्भाले रखा है।
हाथों में थामे हाथ मुझे ले चला कहाँ हाथों में थामे हाथ। हाथों में थामे हाथ मुझे ले चला कहाँ हाथों में थामे हाथ।
मैं कुछ भूली नहीं और तूने कुछ भी याद ना किया। मैं कुछ भूली नहीं और तूने कुछ भी याद ना किया।
बनो महान ऐसे। खिलो विहान जैसे।। बनो महान ऐसे। खिलो विहान जैसे।।
ना द्वेष,ना कलेश ना कोई अभिमान जहां हर नारी को साथ लेकर निर्मित करूं नया संसार। ना द्वेष,ना कलेश ना कोई अभिमान जहां हर नारी को साथ लेकर निर्मित करूं नया संस...
मन के तारों से उत्पन्न जीवन राग इत- उत ढूंढ़ रहा। मन के तारों से उत्पन्न जीवन राग इत- उत ढूंढ़ रहा।
कान्हा जब माखन चुराए गोपियों का मन भी चुराए। कान्हा जब माखन चुराए गोपियों का मन भी चुराए।