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संदीप सिंधवाल

Classics

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संदीप सिंधवाल

Classics

महाराज-जसराज

महाराज-जसराज

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कुंडलियां


संगीत के पंडित थे, 

सुरों के महाराज।


पॉप रेप हुड़दंग में, 

न बजेगा जसराज।।


न बजेगा जसराज, 

छोड़ गया है धरती।


संगीत तो अजर है, 

सबके कंठ बसती।।


कहे 'सिंधवाल' मित्र,

सुरों से बनी रे मीत। 


मन अशांत होय तो,

सुनें शास्त्रीय संगीत।।


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