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अनूप अंबर

Drama Thriller Others

4  

अनूप अंबर

Drama Thriller Others

मेरी यात्रा

मेरी यात्रा

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वो समय था सर्दी का,

और जाना भी जरूरी था,

मेरे एक दोस्त की शादी थी 

घर आया एक निमंत्रण था ।।


धीरे धीरे शाम भी ढलती जाती थी,

सर्दी की ठिठुरन भी बढ़ती जाती थी।

सर्द हवाएं तन मन को बड़ा सताती थी

मुझको मालूम है वो शाम कैसे गुजारी थी


अभी तो सिर्फ दस बजे थे,

कि गाड़ी खराब हो गई थी ।

अभी सर्दी में हालत खराब,

और ये चिंता भी लग गई थी।।


वो सुनसान सा इलाका था,

कोई बस्ती भी नहीं दिख रही थी

मेकैनिक कहां मिलेगा अब,

सब में ये बात हो रही थी ।।


सर्दी के वो सर्द झोंके,

तन को तोड़ जाते थे ।

वो एक पल मेरे जीवन के,

सौ वर्षों से मुश्किल गुजरे थे ।।


आया एक मेकैनिक उसने,

गाड़ी को झटपट ठीक किया ।

बहुत ही मुश्किल भरा हुआ,

ये मेरा एक सफर रहा ।।


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