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Ratna Kaul Bhardwaj

Tragedy

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Ratna Kaul Bhardwaj

Tragedy

मेरे अपने

मेरे अपने

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न जाने एक राह पर चलते चलते

कब हम दोराहे पर आ गए

तुमने एक राह पकड़ी, मैंने एक

कई मोड़ आए वापिस मुड़ने के लिए,

पर न तुम मुड़ गए, न हम, और

इस तरह सिर्फ फासले बढ़ते गए

और यूं जिंदगी से हम हारते रह गए।

काश गफलतों को हवा न दी होती

एक बार खुल के बात की होती

ए नसीब! जिंदगी यह न होती

अपनी कहानी कुछ और ही होती

मेरी रूह में तुम बसे होते,

तेरी में हम सकून पाते

मेरी रूह तेरी गुलाम होती,

तुम मेरे अपने होते, मेरे अपने......



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