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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

Romance Others

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राहुल द्विवेदी 'स्मित'

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मेरे अंदर का शायर

मेरे अंदर का शायर

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गर कुछ करने का दिल है ।

दूर कहाँ फिर मंजिल है ।।


डूब नहीं सकती कश्ती,

गर मेरा तू साहिल है ।


जिसने मन में ठान लिया,

उसको ही सब हासिल है ।


तेरी जिद हम दोनों के,

अरमानों की कातिल है ।


मेरे अंदर का शायर,

अब तुझ में भी दाखिल है । 


ये मासूम दीवाना दिल,

क्या तेरे भी काबिल है ।



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