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AMAN SINHA

Romance Tragedy Fantasy

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AMAN SINHA

Romance Tragedy Fantasy

मैं वफा की चाह में

मैं वफा की चाह में

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मैं वफा की चाह में, जिंदगी की राह में

बिन थके चलता रहा, सीपियाँ चुनता रहा 

कोरी थी वो कल्पना धानी सूत से बना 

जिससे मैं प्रेम के चित्र बस बुनता रहा 


मुट्ठी भर उठाई थी, लहरों से चुराई थी 

उँगलियों की छेद से रेत सब बहता रहा 

धूप की तलाश में अंधविश्वास में 

व्यर्थ से मंत्रों का मैं जाप करता रहा 


सत्य जो समक्ष था मुझपर वो प्रत्यक्ष था 

मैं निगाहें फेर कर उससे ही बचाता रहा 

अश्क जो बहे नहीं , शब्द जो कहे नहीं 

तेज़ हथियार से अपने घाव सिलता रहा 


जीतने भी जतन किए, अथक जो प्रयत्न किए 

बैठकर अंधेरे में मैं हिसाब जोड़ता रहा 

याचना हजार की बंद किए द्वार भी 

पर मुझे धिक्कार कर तेरा जाना देखता रहा 


मैं वहीं खड़ा रहा, तू जहां से चला 

ठगा हुआ सा हृदय मेरा तेरी राह टोहता रहा 

मैं वफा की चाह में, जिंदगी की राह में

बिन थके चलता रहा, सीपियाँ चुनता रहा


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