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Prateek Jain

Abstract Inspirational Others

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Prateek Jain

Abstract Inspirational Others

मैं आईना हूं।

मैं आईना हूं।

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काले चेहरे गोरे चेहरे, चेहरे कई रंग के
रोज मैं देखा करूं इंसान कई ढंग के
सजती संवरती बिटिया से मैं घंटों तक बतियाता हूं
मैं आईना हूं आओ तुम्हे मेरी कहानी सुनाता हूं।

बाबूजी के सर पे दो बाल
धोती कुर्ता और एक शॉल 
आंखों पर ऐनक गमगीन
बाबूजी ग़ज़लों के शौकीन
जब भी मुझमें खुद को देखें बीता ज़माना याद दिलाता हूं
मैं आईना हूं आओ तुम्हे मेरी कहानी सुनाता हूं।

मालकिन में कुछ दोष है
न जाने किस बात का रोष है
हर दफा वो गुर्राती है
मुझे भी तो आंख दिखाती है
मैं तो सच हूं, मै कहां झूंठ जितना शोर मचाता हूं
मैं आईना हूं आओ तुम्हे मेरी कहानी सुनाता हूं।

मालिक तो कभी कभी आते हैं
दिन रात वो पैसे कमाते हैं
जब भी देखते हैं मुझको
अपनी घड़ी की तरफ नज़र घुमाते हैं
मैं भी उनको वक्त उल्टा दिखलाता हूं
मैं आईना हूं आओ तुम्हे मेरी कहानी सुनाता हूं।

वक्त का प्रतिबिंब हूं मैं देखे हैं कई साल
बचपन जवानी और बुढ़ापा जीवन के सब काल
जो मुझमें खुद को ढूंढे वो इंसान नादान
जो मुझ संग वक्त बिताए वो व्याकुल परेशान
मैं छलावा हूं फिर भी सत्य सत्य चिल्लाता हूं
मैं आईना हूं आओ तुम्हे मेरी कहानी सुनाता हूं।।


- प्रतीक


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