पानी उस तरफ बह रहा है।
पानी उस तरफ बह रहा है।
पानी उस तरफ बह रहा है, उसी तरफ बहेगा
हुकूमतों का शीशा है, सच ही तो कहेगा
उस बात को वक्त हो गया, उस बात को भूल जाओ
राजा साहब का भरोसा है इंकलाब हो कर रहेगा
मुनासिब नहीं है कि और सवाल पूछे जाएं अब
ये संविधान इतने इल्जाम भला कैसे सहेगा
खा जाते हैं जानवर को जानवर और इंसान को इंसान
यही होता आया है, यही होता रहेगा
जब खामोशी ही सुकून बन जाए तब
किसी को अपना भी कोई कैसे कहेगा
प्रतीक तू नादान है तू क्या जाने सियासत के खेल
पानी कहां बहना है और पानी कहां बहेगा
- प्रतीक
