STORYMIRROR

Prateek Jain

Others

4  

Prateek Jain

Others

किसी को

किसी को

1 min
381

किसी को छत कम पड़ी मांझा समेटने को
किसी ने सारे शहर में पतंग उड़ाई हैं 
किसी को कम पड़े रंग फुलझडियों के
किसी ने बीन बीन मोमबत्तियां जलाईं हैं

किसी को ज्यादा नमक से रंज
किसी की भूख जीवन पर तंज
किसी को लपेट दिया रुई के गलियारों में
किसी ने मवेशियों संग गर्मी पाई है

किसी को किसी की सोहबत से बैर
किसी के झूमते नंगे पैर
किसी को गुड्डे गुड़िया भी कम
किसी ने पत्थरों से यारी निभाई है

किसी के सपनों में भी राहतें 
किसी की जिंदगी में भी ज़िल्लतें
किसी ने एक कंकड़ उस ओर फेंका
किसी के शामियाने पर आफत बन आई है

किसी को उजाला और रब मिला
किसी को अंधियारे का सबब मिला
पालने में थे दो नसीब
किसी को बाहों में तारे मिले
किसी ने तारो की बाहों में ज़िन्दगी बिताई है


- प्रतीक


Rate this content
Log in