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Prateek Jain

Romance Tragedy

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Prateek Jain

Romance Tragedy

मुबारक है

मुबारक है

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फिर से उसे हो गई मोहब्बत मुबारक है
मेरे दिल को भी अब है इजाज़त मुबारक है

आइने में एक अक्स देख कर सोचता हूं
है अब नए आइने की ज़रूरत मुबारक है

बहुत दिल लगा कर बहुत दिल दुखा कर
दिल को नहीं अब किसी से अक़ीदत मुबारक है

मुट्ठी में रेत को करके क़ैद मैंने जाना
इश्क-ए-सहरा में किसी और की हुक़ूमत मुबारक है

लम्हा दर लम्हा जुड़ने लगा हूं खुद से वापिस
शायद नहीं रही तेरी चाहत मुबारक है

किसी भी जानिब अब सफ़र को मोड़ा जाए
नए रस्ते नई मंजिल नई हक़ीक़त मुबारक है

सुकून की तलाश में सुकून से बैर बना बैठा
जब से हुआ हूं काफ़िर मिली है राहत मुबारक है

तुझे ही अब नई बुनियाद रखनी होगी प्रतीक
तेरी चौखट तेरा दर तेरी इमारत मुबारक है

- प्रतीक जैन


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