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अनूप सिंह चौहान ( बब्बन )

Tragedy

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अनूप सिंह चौहान ( बब्बन )

Tragedy

मासूम

मासूम

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हँसता खेलता सच्चा बचपन,

आधा कच्चा-पक्का बचपन,

खुद को रोके बैठा था

सोच रहा था इतना ज्यादा

खुद को खो कर बैठा था

इतने अश्रू बहा चुका था कि

मुँह को धोकर बैठा था

कारण था हाँ एक अकेला

माता पिता में न था मेला

फैला था घर में झमेला

झगड़ा गुस्सा हाथापाई

घर मे इसका राज था

सुना जब से अलग है होना

रूप प्रभु का उदास था


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