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Nand Kumar

Tragedy


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Nand Kumar

Tragedy


शिक्षक का दर्द

शिक्षक का दर्द

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शिक्षा जब से व्यापार हुई ,

शिक्षक की हालत पस्त हुई।

शिक्षार्थी हुए निरंकुश सब ,

नैतिक मूल्यों की हानि हुई ।।


बिन मेहनत डिग्री मिल जाती ,

शिक्षक से टूट गया नाता ।

इसलिए बढी डिग्रियां मगर ,

अब ज्ञान नही मिलने पाता ।।


जो मेहनतकश ज्ञानी गुरुजन ,

वे जीवन जिएं अभावो में ।

भारत के भाग्य विधाता को ,

लगते सालों हक पाने में ।।


प्राइवेट शिक्षक का हो शोषण ,

वेतन भी कम वह पाता है ।

फिर भी स्वकर्म रत वह शिक्षक ,

शासन से उपेक्षा पाता है।।


शिक्षक शोषण हकमारी से ,

अज्ञान धरा पर छाएगा ।

विद्वतजन की आहो द्वारा ,

जग का उपवन मुरझाएगा ।।



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