STORYMIRROR

Devendra Tripathi

Tragedy

4  

Devendra Tripathi

Tragedy

पैसा

पैसा

1 min
402

जिधर देखो उधर दिखते हैं, कटे हुए हाथ

कहीं दवा की कालाबाज़ारी करते हुए,

कहीं ऑक्सिजन की चोरी करते हुए,

कहीं नाजायज़ पैसे वसूलते हुए,

कहीं कमजोरो को दबाते हुए,

कटे हुए हाथ आजकल बहुत दिखते हैं।।


हर चौराहे पर मिलते है, कटे हुए हाथ,

कहीं लोगो का पैसा चुराते हुए,

कहीं लोगो को बेवकूफ बनाते हुए,

कहीं लोगो को बरगलाते हुए,

कही अपना उल्लू सीधा करते हुए,

कटे हुए हाथ आजकल बहुत दिखते हैं।।


हर तरफ दिखते हैं, कटे हुए हाथ,

कभी निर्दोषों को दोषी बनाते हुए,

कभी अपनों को प्रताड़ित करते हुए,

कभी अपनी ताकत दिखाते हुए,

कभी मानवता को शर्मसार करते हुए,

कटे हुए हाथ आजकल बहुत दिखते हैं।।



ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ

Similar hindi poem from Tragedy