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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Fantasy Inspirational

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कवि काव्यांश " यथार्थ "

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मां दुर्गा जी के नौ रूपों की व्याख्या

मां दुर्गा जी के नौ रूपों की व्याख्या

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माँ दुर्गा के नौ रूपों की व्याख्या 

(माता जी के गान के रूप में)

॥ मंगल रूपे जय माँ भवानी ॥

।।हर कष्ट हरे हे मां कल्याणी ।।

नव रूपों में बसती माता,         करती भक्तों का उद्धार।

सुनो सजीव ये गाथा पावन,        सारा हर लेती संसार॥

१. शैलपुत्री

पहाड़ों की बेटी कहाई,           शक्ति स्वरूपा माँ कहलाई।


त्रिशूल हाथ, चंद्र शिखा पर,          जो भी पुकारे, उसने रक्षा पाई॥

२. ब्रह्मचारिणी

ज्ञान और तप की ज्योति जलाए,      माँ ब्रह्मचारिणी कहलाए।

रुद्राक्ष माला, कमंडल धारी,         कृपा करें सब संत सुखारी॥

३. चंद्रघंटा

सुनो भक्तों माँ की गाथा,           चंद्र सम शोभा है जिसकी माथा।

रण की देवी, साहस लाए,           हर संकट से रक्षा पाए॥

४. कूष्मांडा

हास्य मात्र से सृष्टि रचाई,        नवग्रहों की देवी कहाई।


सूर्य सम तेज, करे कल्याण,        भक्तों के घर सुख की बान॥

५. स्कंदमाता

माता स्कंद, पुत्र की रक्षा,           गोद में बैठा है प्यारा बच्चा।

करुणा बरसे, ममता छलके,          हर संकट से भक्त को उबारे॥

६. कात्यायनी

संतों की रक्षा करने आई,       महिषासुर मर्दिनी कहलाई।


क्रोध में देवी, दुष्ट संहारे,          धरती का संताप उतारे॥

७. कालरात्रि

काली माँ जब रूप दिखाए,         पापी दुनिया काँप ही जाए।            

अंधकार में ज्योति जलाती,         दुष्टों का संहार कराती॥

८. महागौरी

सफेद वस्त्र, उज्जवल काया,         माँ ने भक्तों को अपनाया।


सुख, समृद्धि, सौभाग्य लाए,     नवजीवन की राह दिखाए॥

९. सिद्धिदात्री

सिद्धि का वरदान जो देती,         भक्तों के दुख हर लेती।


भव सागर से तारती माता,          नव दिन की पूजा धन्य विधाता॥



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