माँ, देख आसमान में कोई बालक रोता है
माँ, देख आसमान में कोई बालक रोता है
माँ, देख आसमान में कोई बालक रोता है।
चोट लगी है शायद उसको,
या फिर
वह भूखा है
रुक – रुक कर, चुप हो कर
फिर – फिर जो रिरियाता है !
माँ देख, आसमान में कोई बालक रोता है।
डरता होगा मुझ सा ही,
बादल में
बजते डमरू से
फिर क्यों न वह भी
जा अम्मा के आंचल में छिप जाता है!
माँ देख, आसमान में कोई बालक रोता है।
झटका तो न खाया होगा उसने
बिजली की
कड़कती तारों का !
पर क्यों न दौड़ा – दौड़ा
वह चंदा मामा के घर जाता है !!
माँ देख, आसमान में कोई बालक रोता है।
