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DHANSHRI KABRA

Abstract

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DHANSHRI KABRA

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लम्हे जिंदगी के....

लम्हे जिंदगी के....

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हँसते खिलखिलाते गुनगुनाते मन ही मन मुस्काते,

खुशकिस्मत भाग्यवान होने का एहसास दिलाते,

तो कभी रुलाते छटपटाते आंसुओं के सागर में डुबा

जिंदगी तो झंड है इस सच से रूबरू करवाते,

जीवन के ये अनगिनत न ठहरते पल

आखरी सांस तक ना जाने कितना कुछ सीखते,

कभी यादों की सुनहरी नगरी में पहुंचा

जोश और स्फूर्ति का उबाल ला प्रसन्नता का आलम लाते,

कभी अंधेरे से भी हमारा याराना बड़ा गहरा था


गम के किस्सों की याद दिलवा आंखों को नम कर जाते,

कभी अपनी कड़वाहट के चक्र में फंसा

आगे बढ़ती जिंदगी पर फिर भी ठहरी सी सांसों में अटकाते,

तो कभी अपनी मिठास भरी चाशनी में घोलकर

रंगीन आज और खूबसूरत कल की बातों में घुमाते,

आईने से साफ व्यक्तित्व को सच-झूठ के चंगुल में लटका

उलझनों के घेरे में भ्रांति भरे जीवन झोले को अस्तव्यस्त करवाते,

अतीत की अनुभूतियों से संवारते तजुर्बों को संजोते

साथ ही साथ भविष्य की चिंता में ब्लडप्रेशर का बैलेंस हिलाते,

आलस लड़कपन बचपने से हाथ आए संयोग को छीनते

तो कभी सामने से अवसर दिलवा मेहनत कर आगे बढ़ने का मौका देते,

ये पल भी ना जाने कौन सा टोटका है जानते

जो हर दफा नाविन्यता भरी रहेगी जिंदगी सदा इसका बोध करवाते!!!


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