STORYMIRROR

Kavita Sharrma

Abstract

4  

Kavita Sharrma

Abstract

नयी सुबह

नयी सुबह

1 min
266

अंधकार ने पूछा रात से 

नयी सुबह कब आयेगी

रात बोली इस अंधकार 

की यात्रा पूरी जब होगी 

तब ही रोशनी छा जायेगी 

हर रात की इक नयी 

सुबह होती ही है जरूर

पर संघर्ष अपना जारी 

रखना ही पडता है जरुर 

बिना रुके बिना थके 

करते रहो तुम काम

जीवन से तुम्हारे भी 

इक दिन दूर हो आयेगा

अंधकार का नाम ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract