Kavita Sharrma
Abstract
जब तक सर पर साया है किसी हमदर्द का जिंदगी सुकून से गुज़र सकती है कोई है अपना इससे जीने की हिम्मत मिलती है कोई एक है जिसे हमारी फ़िक्र भी रहती है बस उसी साये में जिंदगी धूप से सुरक्षित रहती है।
शिक्षा
कोई अपना....
ठहराव...
तुम बिन
शब्दों का माय...
मोहब्बत
साथ तुम्हारा
प्रेम की डगर
नया साल नयी उ...
सीख
ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता। ख्वाइशों से बढकर जो मिले उसका कोई किनारा नही होता।
परिवर्तन तो प्रकृति का शाश्वत नियम दुख और निराशा से उबर रख संयम परिवर्तन तो प्रकृति का शाश्वत नियम दुख और निराशा से उबर रख संयम
सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है। सृजनशीलता की विजय है, जगत के संगीत की पहचान है।
जीवन सारी बीती महलों में अंत समय में कचरा जीवन सारी बीती महलों में अंत समय में कचरा
नंदी जी पर सवार हो तीनों लोक घूम आते। नंदी जी पर सवार हो तीनों लोक घूम आते।
रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार। रहें न हम इससे अनभिज्ञ है यही अनुभूति हमारे जीवन का आधार।
वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है। वृक्षों और सुंदर जानवर से भरा, जंगल बहुत ही सुंदर लगता है।
हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।। हाले ग़म कह ना सकें बज़्म ए सुख़न। 'मीरा' गाती थी ऋचाएं क्या हुईं।।
कभी तो मुस्कुराओ तुम, जब होता है उजियारा, छुप जाता है अंधियारा। कभी तो मुस्कुराओ तुम, जब होता है उजियारा, छुप जाता है अंधियारा।
शक्ति पवन चक्की की तरह ऊर्जा में परिवर्तित होकर बन जाती है रीते मन की पवन चक्की शक्ति पवन चक्की की तरह ऊर्जा में परिवर्तित होकर बन जाती है रीते मन ...
पीर भी पूछे रास्ता बाहर जाने का सोचो कैसा हाल हमारी दिल्ली में। पीर भी पूछे रास्ता बाहर जाने का सोचो कैसा हाल हमारी दिल्ली में।
वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी? वैसे ही क्या ये दुनिया बिना नारी के चल पाएगी?
कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया। कौन हूँ मैं! सोचा, तो घबरा गया।
वो मेरी अक्स भी है, मेरी तस्वीर भी है वो मेरी मुर्शिद भी, और मेरी पीर भी है। वो मेरी अक्स भी है, मेरी तस्वीर भी है वो मेरी मुर्शिद भी, और मेरी पीर भी है।
हमारी आपकी किस्मत कब कहां कैसे गुल खिलाएगी? हमारी आपकी किस्मत कब कहां कैसे गुल खिलाएगी?
वो खुश दिखाई देता और अंतस के रंगों में गमगीन दिखता है. वो खुश दिखाई देता और अंतस के रंगों में गमगीन दिखता है.
उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर, उलझ गए हैं हम, अपनी जिम्मेदारियों में इस क़दर,
गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है। गरीबी इन गरीबों को पैरों तले, हर लम्हा रौंधती है।
सुनो तुम्हें बिना बताये लिये हैं कुछ संकल्प। सुनो तुम्हें बिना बताये लिये हैं कुछ संकल्प।
उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना। उसके दुख- दर्द मेरे हवाले कर दे, सारे आजा़र से मेरे हमसफर को बचाना।